हमारी कहानी
हमारी पहली मुलाक़ात पुरानी किताबों की एक दुकान में हुई। हम दोनों ने एक ही उपन्यास की आख़िरी प्रति उठाने के लिए हाथ बढ़ाया था। जूलियन ने किताब एलोइज़ को दे दी — इस शर्त पर कि कॉफ़ी पर मिलकर वह उसे कहानी का अंत बताएँगी।
वह कॉफ़ी चार घंटे चली। उपन्यास पूरा पढ़ने में हमें एक साल लग गया, क्योंकि हम अपनी ही कहानी लिखने में खोए रहे।
पिछले वसंत में एलोइज़ को उसी किताब के पन्नों के बीच हाथ से लिखा एक ख़त और एक अंगूठी मिली। ख़त में बस इतना लिखा था: “क्या इस कहानी के बाकी पन्ने भी मेरे साथ लिखोगी?”